चीज़ से भरी जॉर्जियाई रोटी, खाचापुरी ओवन से निकलते ही तपती हुई परोसी जाती है—पतली परत, नमकीन भीतरी हिस्सा और हर टुकड़े के साथ लंबा खिंचता चीज़.
खाचापुरी सुकून देने वाले खाने की हर कसौटी पर खरा उतरता है : सुनहरी परत, पिघला हुआ चीज़, मक्खन, और यह लगभग अटल नियम कि इसे ओवन से निकलते ही खाया जाए.
जॉर्जिया में यह सिर्फ़ एक साधारण भरवां रोटी नहीं है. यह पारिवारिक मेज़ का हिस्सा है, 27 फ़रवरी को इसका राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है, और इसकी कीमत पर आईएसईटी के खाचापुरी इंडेक्स में भी नज़र रखी जाती है, जो आटा, चीज़, यीस्ट, अंडे और मक्खन पर आधारित है.
खाचापुरी क्या है ?
इस नाम की जड़ें खाचो, यानी जमा हुआ दूध, और पुरी, यानी रोटी, में हैं. इसलिए “चीज़ वाली रोटी” इसका सही, लेकिन थोड़ा अधूरा, अनुवाद है. एक बढ़िया खाचापुरी खमीर उठे गेहूं के आटे से बनता है, जो भरावन को अच्छी तरह समेट सके और इतना पतला भी रहे कि चीज़ के स्वाद पर भारी न पड़े.
पारंपरिक तौर पर इसमें अक्सर इमेरुली, जो ताज़ा और हल्का खट्टा होता है, और सुलगुनी, जो ज़्यादा लोचदार और नमकीन घोल में रखा जाता है, दोनों चीज़ मिलाए जाते हैं. पहला दुग्धीय दानेदारपन देता है, दूसरा वह लज़ीज़ खिंचाव लाता है.

मिज़ाज में यह भरी हुई रोटियों की उसी परंपरा से जुड़ता है, जैसे जॉर्जियाई रसोई के खिंकाली या भारतीय चीज़ नान, लेकिन खाचापुरी अपनी अलग पहचान बनाए रखता है : नमकीन आटा, भरपूर भरावन और तुरंत परोसना.
इमेरेती से जॉर्जियाई मेज़ों तक
खाचापुरी शब्द का लिखित प्रमाण 1725 से मिलता है. इससे भी पुराने ग्रंथों में जॉर्जिया के पश्चिम में स्थित कोल्खिस क्षेत्र की चीज़ भरी रोटियों का उल्लेख मिलता है, लेकिन वे केवल संकेत हैं, मौजूदा रेसिपी का सीधा प्रमाण नहीं.
यह व्यंजन मुख्य रूप से क्षेत्रीय परंपराओं में आकार लेता गया, जहाँ इसके अलग-अलग रूप चीज़, ओवन और स्थानीय खानपान की आदतों से जुड़े रहे.

इमेरुली रूप बंद गोल रोटी जैसा होता है, जिसके भीतर चीज़ भरा होता है. मेग्रुली में ऊपर से सुलगुनी की एक अतिरिक्त परत डाली जाती है. अजारुली, जो नाव के आकार का होता है, पकने के आखिर में अंडे की जर्दी और मक्खन के साथ पूरा किया जाता है.
मेस्खेतिया से आया मेस्कुरी अक्सर बहुत पतला बेलकर बनाया जाता है और उसमें पशु वसा का इस्तेमाल होता है, जबकि पेनोवानी परतदार रूपों में गिना जाता है.
खाचापुरी की मुख्य सामग्री

गेहूं का आटा आटे को उसकी बनावट देता है. इसमें इतना ग्लूटेन बनना चाहिए कि यह भरावन को अच्छी तरह थामे रख सके, लेकिन परत मोटी न हो. दूध, छाछ या पानी इसे नमी देते हैं, और जब अंदरूनी बनावट को ज़्यादा मुलायम रखना हो, तब परंपरागत रूप से हल्के खट्टे तरल को प्राथमिकता दी जाती है.
फुलाने वाले पदार्थ परिवार के अनुसार बदलते हैं. खाशी, एक प्राकृतिक खमीर, धीमा किण्वन देता है. मात्सोनी, जो एक हल्का खट्टा जॉर्जियाई दही है, उसे बेकिंग सोडा के साथ मिलाया जा सकता है. सूखा यीस्ट भी सुविधाजनक है, बस आटे का स्वाद नमकीन ही रहे और वह मीठी ब्रियोश न बन जाए.

चीज़ ही इस व्यंजन का पूरा चरित्र तय करता है. इमेरुली भरावट, ताज़गी भरा दुग्धीय स्वाद और काटते समय हल्का-सा प्रतिरोध देता है. सुलगुनी बेहतर पिघलता है और लंबे धागों की तरह खिंचता है. जॉर्जिया के बाहर, अच्छी तरह निथारी हुई मोज़रेला में थोड़ा-सा हवर्ती, एमेंटल या कम नमकीन फेटा मिलाकर उस संतुलन के काफ़ी करीब पहुँचा जा सकता है.

सामग्री
आटे के लिए
- 1 kg मैदा
- 50 g बेकरी यीस्ट
- 480 ml दूध
- 3 अंडे
- 3 बड़े चम्मच तेल पकाने के लिए
भरावन के लिए
- 1 kg इमेरुली चीज़ इसके बदले 50% सूखी मोज़ारेला और 50% फेटा का मिश्रण इस्तेमाल करें
- 3 अंडे फेंटे हुए
- 50 g मक्खन
- 1 अंडे की जर्दी ऊपर लगाने के लिए
विधि
विधि
- दूध को हल्का गुनगुना करें और उसमें बेकरी यीस्ट घोल दें।480 ml दूध, 50 g बेकरी यीस्ट

- अंडे डालकर मैदा मिलाएँ।3 अंडे, 1 kg मैदा

- आटे को तब तक गूंधें, जब तक वह मुलायम और एकसार न हो जाए।

- आटे को किसी गुनगुनी जगह पर रखें और 3 से 4 घंटे तक फूलने दें।

- चीज़ कद्दूकस कर लें (या हाथ से मसलकर चूरा कर लें)।1 kg इमेरुली चीज़
- चीज़ को फेंटे हुए अंडों और मक्खन के साथ मिलाएँ।3 अंडे, 50 g मक्खन
- आटे को 4 बराबर हिस्सों में बाँटें, फिर हर हिस्से को बेलकर एक गोल डिस्क बना लें।

- भरावन को 4 बराबर हिस्सों में बाँटें और हर डिस्क के बीच में एक हिस्सा रखें।

- किनारों को बीच की ओर समेटते हुए आटे को बंद कर दें।

- फिर इसे हल्के हाथ से दोबारा बेलें।
- ऊपर अंडे की जर्दी लगा दें।1 अंडे की जर्दी
- थोड़े से तेल के साथ पैन में, या 200 °C पर ओवन में, तब तक पकाएँ जब तक यह अच्छी तरह सुनहरा होकर अंदर तक पक न जाए।3 बड़े चम्मच तेल

